“ विश्वास की डोर ”

कठिन पथरीली राहों पर चलकर जीवन की मंजिल पा ही लेंगे ,
जमाना कुछ भी कहे, दिलों में मोहब्बत का “दिया” जला ही देंगे I

“विश्वास की डोर ” से मेरे जीवन की पतंग आसमान में उड़ती गई ,
“प्यार के धागे” से मेरी पतंग आसमान की ऊंचाईयों को छूती गई ,
“ईमान के कागज ” से सजी पतंग बिना खौफ खूब निखरती गई ,
लाख तूफ़ान आये आसमान में, फिर भी मेरी पतंग आगे बढ़ती गई I

कठिन पथरीली राहों पर चलकर जीवन की मंजिल पा ही लेंगे ,
जमाना कुछ भी कहे, प्यार का पौधा हर एक दिल में उगा ही देंगे I

“नफरत के मांझे ” ने इसे दूर आसमान में बहुत डराया ,
“घ्रणा- द्वेष ” के काले बादलों ने हमेशा इसको सताया ,
“फरेब” की बिजलियों का साया इसपर हर पल मंडराया ,
“ जग के मालिक ” की एक नज़र ने इसे सबसे बचाया I

कठिन पथरीली राहों पर चलकर जीवन की मंजिल पा ही लेंगे ,
“इंसानियत का फूल ” गुलशन में चौतरफा खिलाकर ही जायेंगे I

“राज” विश्वाश की पतवार से “जीवन की कश्ती ” तेरी पार ही हो जाएगी ,
एक न एक दिन अपने जीवन के अंतिम मंजिल तक जरूर पहुँच ही जाएगी ,
“ परम पिता ” के दरबार में इस गुनाहगार की फरियाद जरूर सुनी जाएगी ,
कश्ती “जग के मालिक” के चरणों की धूल लाकर मेरे माथे जरूर लगाएगी I

कठिन पथरीली राहों पर चलकर जीवन की अंतिम मंजिल पा ही लेंगे ,
“परम पिता” की दी कलम से , प्यार की खुसबू बिखेर कर ही जायेंगे I

देशराज “ राज ”

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