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**विश्वासघात = पाकिस्तान**

Abhishek Parashar

Abhishek Parashar

कविता

August 8, 2017

विश्वासघात न करो जग में, यह पाप बड़ा कहलाता है,
पड़ता वह तिर्यक योनि में, जो इस दुर्गुण को अपनाता है।।1।।
जुड़ता मानव, मानव से, वह विश्वास ही तो कहलाता है,
विश्वास न हो यदि जीवन में, व्यवहार धरा रह जाता है।।2।।
व्यवहार को परिभाषित हम, विश्वास से ही दे सकते हैं,
विष जैसा विश्वास दिया, इसे व्यवहार कैसे कह सकते हैं ।।3।।
विश्वास के गाढ़े रूप से, ईश्वर भी प्रकट हो जाते हैं,
जिसने इसका अनुसरण किया, वह महापुरुष कहलाते हैं ।।4।।
विश्वासघात किया जिसने,इतिहास में कई उदाहरण हैं,
थू-थू करता है समाज, कहता वो तो कायर हैं ।।5।।
ऐसे कुत्ते कायर काश्मीर में पैदा होते हैं,
कुछ सरकारें सह देकर के,उनको शेर बना देते हैं।।6।।
कहलाता वो शेर कैसे, जिस गधे ने शेर की चमड़ी पहनी हो,
पाकिस्तानी चमचागीरी जिनको बस सहनी हो।।7।।
बहुत हुई अब चमचागीरी, अब तो तुम्हारा मुँह टूटेगा,
एक एक मारे जाओगे, बाकी का पसीना छूटेगा।।8।।
ध्यान करो, बहुत हुआ,अब भी आत्म समर्पण कर दो,
नहीं तो कुत्ते की मौत मिलेगी,बाकी को सावधान कर दो।।9।।
यज्ञभूमि में चढ़ाने को शीश तुम्हारे काटेंगे,
होम करेंगे दिन प्रतिदिन, एक गिनें सौ काटेंगे।।10।।
काश्मीर की घाटी के प्रति नज़र उठाना बन्द करो,
आँखो से खेलेंगें के कंचे,आँख दिखाना बन्द करो।।11।।
दमन करेंगे ऐसा कि याद करेगा पाकिस्तान,
नव पीढ़ी भी चिल्लाएगी जय भारत जय हिन्दुस्तान।।11।।
शीश काट लेना सैनिक का क्या यही तुम्हारा वीर धर्म,
कुत्तो जैसे कर्म करो,और फिर कहते हो पाक कर्म।।12।।
फूलों से होगा स्वागत यदि नीति जैसी बात करोगे,
काश्मीर तो है ही हमारी,नहीं तो कराँची दे बैठोगे।।13।।
औकात की यदि बात करो तो, दूध पिए से बच्चे हो,
डीएनए करवालो अपना भारत के ही बच्चे हो।।14।।
कुछ तो शर्म करो आँखों में कुछ तो सत्य वचन अपना लो,
गोलीबारी बन्द करो और विश्वास का हाथ बढ़ा लो।।15।।
भारत विश्वसनीय है ऐसा विश्वास करो तुम,
पर काश्मीर की घाटी के प्रति न भाई आँखे चार करो तुम।।16।।
ऐसा भी ऐहसान समझ लो, भारत ने तुम्हें अभी नहीं दबाया,
दया भरी है खून हमारे, ऐसा हमको पाठ पढ़ाया।।17।।
पुनरावृत्ति करी यदि ऐसी,तो मिट्टी में मिल जाएगा,
बचा हुआ जो कोई भी होगा वह भी जय भारत जय चिल्लाएगा।।18।।

##अभिषेक पाराशर##

Author
Abhishek Parashar
शिक्षा-स्नातकोत्तर (इतिहास), सिस्टम मैनेजर कार्यालय-प्रवर अधीक्षक डाकघर मथुरा मण्डल, मथुरा, हनुमत सिद्ध परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से कविता करना आ गया, इसमें कुछ भी विशेष नहीं, क्यों कि सिद्धों के संग से ऐसी सामान्य गुण विकसित हो जाते है।... Read more
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