· Reading time: 1 minute

जरा ठहरो

लो जी,
ये भी काम हो गया,
आदमी बेहद परेशान,
विश्राम का अभाव,
रोटियों का मोहताज़,
फिर भी
मोबाइल का दीवाना
उसे चलाना,
एक जरुरी काम हो गया.
दुष्परिणाम दिखाई देने लगे है,
अब इसके चलते.
लोग सुधबुध खोने लगे हैं,
डिजिटल इंडिया
कैशलेस हो गया है,
घरेलू बाजार खत्म,
रसोई के स्वाद.
बिगड़ गया.
बीमारियां पांव पसार रही है,
सच पूछो तो दुनिया,
खौफ में जी रही है.

डॉक्टर महेन्द्र सिंह हंस

1 Like · 1 Comment · 98 Views
Like
Author
526 Posts · 53.7k Views
निजी-व्यवसायी लेखन हास्य- व्यंग्य, शेर,गजल, कहानी,मुक्तक,लेख
You may also like:
Loading...