विशेष.. शायरी

विशेष…”शायरी”
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हौंसला है कुछ विशेष करने का इरादा है।
सबके दिलों में दिल से उतरने का इरादा है।।
हे रब! कभी भूल से भी शूल न बन जाऊँ।
रुहे-चमन में फूल बन खिलने का इरादा है।।

इंसानियत की मशाल मैं जलाने चला हूँ।
सबसे दोस्ती का हाथ मैं मिलाने चला हूँ।।
लबों पर हँसी हो दिल में ख़ुशियों का समां।
वो प्रीत का एक मंज़र मैं दिखाने चला हूँ।।

तन्हा चला हूँ सफ़र में काफ़िला बन जाएगा।
एक दिन मेरा विचार जलजला बन जाएगा।।
ये आँधियाँ भी क्या दीप बुझा पाएंगी प्रीतम।
दिलों में मोहब्बत का सिलसिला बन जाएगा।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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