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विवाह गीत- धरती अम्बर का, आज हुआ संगम…

धरती अम्बर का, आज हुआ संगम।
खुशियाँ ही खुशियाँ, ख़ुशियों का आलम।।
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घोड़े पर है दूल्हा, बाराती मस्तमगन।
समधी के स्वागत में, बारा है तनमन धन।।
बारात पधारी है, स्वागत तैयारी है।
दूल्हा छवि प्यारी है, हर आँख निहारी है।।
चंदा-सूरज का, आज हुआ संगम।
खुशियाँ ही खुशियाँ, ख़ुशियों का आलम।।
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नाचें बाराती, मदहोशी छाई है।
मधुरम शहनाई, हर मन को भाई है।।
फूफा जी नाचें, नाचें है सब जीजा।
मामा और चाचा, खाते हैं अब पीज़ा।।
सरिता-सागर का, आज हुआ संगम।
खुशियाँ ही खुशियाँ, ख़ुशियों का आलम।।
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पावन परिणय की, ये पावन बेला है।
भाँवर वरमाला, सत्कार का रैला है।।
ये रस्म है बंधन की, गाँठे खुली कंगन की।
शोभा घर आँगन की, सजनी और साजन की।
राधा-कृष्णा का, आज हुआ संगम।
खुशियाँ ही खुशियाँ, ख़ुशियों का आलम।।
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ये सास-ससुर ही तो, अब मात पिता तेरे।
ख़ुश रहना और रखना, अब साजन को तेरे।।
बेटी की विदाई है, हुई आज पराई है।
ये कैसी जुदाई है,हर आँख भर आई है।।
सीता-राघव का, आज हुआ संगम।
खुशियाँ ही खुशियाँ, ख़ुशियों का आलम।।
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:- अरविंद राजपूत ‘कल्प’

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