कविता · Reading time: 1 minute

विलाप

विलाप
ये कैसा विलाप
मद्धम स्वर की चीत्कारें
अंतरिक्ष में खोई नज़र का
रूदन
अंतहीन
एक औरत की मृत्यु का
एक मां की मृत्यु का
स्वयं पर करूणा का
भयावह समारोह
कहीं शापित न हो जाये
समय
सम्भल–।

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