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*विरह वेदना*

नयन मेरे निहारें पथ सुहाने गीत गाओ तुम
खिलें फिर फूल गुलशन में लगन ऐसी लगाओ तुम
सजा कर चाँदनी दिल में गये जाने कहाँ पर हो
अधर हैं सूर्य सम तपते सजन बन मेघ आओ तुम
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

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धर्मेन्द्र अरोड़ा
धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर पानीपती"
पानीपत
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*काव्य-माँ शारदेय का वरदान * Awards: विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित