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विरह वेदना

Beena Lalas

Beena Lalas

कविता

July 18, 2016

हॆ लखन..तुम तो श्री राम से भी वज्र भावनाओं के निकले
माँ सीता के वियोग में श्री राम अधीर हो चले
खग मृग सभी थे साक्षी
हाय सीते –हाय सीते कहकर हो रहे थे विकल
मगर सौमित्र अंतर्मन तुम्हारा नहीं हुआ विहल….
नहीं कहा तुमने कभी…हाय उर्मिल..तुम बिन मेरा हृदय भी बोझिल…तुम बिन मेरा हृदय भी बोझिल..
बीना लालस

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Author
Beena Lalas
पति का नाम --खेम सिंह लालस शिक्षा --हिंदी स्नातकोत्तर MA भूतपूर्व आल इंडिया रेडियो एडवाइजर कमेटी मेंबर ईवेंट मेनेजर कविताये और हास्य व्यंग्य लिखती हूँ

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