विरह पर दोहे

1
अपनी आंखों में लिये, सपनों का संसार
सजनी दर पर ही खड़ी, रस्ता रही निहार
2
आँखों मे भी दर्द है ,मुखड़ा बड़ा उदास
सजनी साजन से बिछड़, भूल गई है हास
3
मुख पर घिरा उदासियों, का गहरा सा जाल
पिया के इंतज़ार में, गोरी है बेहाल
4
कुमकुम टीका चूड़ियां, पायल बिछिया हार
छिपा हुआ शृंगार में,भी है कितना प्यार
5
निंदिया बैरन हो गयी, खोया दिल का चैन
तड़पाता है ये विरह,बरसे व्याकुल नैन

23-12-2018
डॉ अर्चना गुप्ता

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