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विरह गीत

सरस्वती कुमारी

सरस्वती कुमारी

कविता

February 14, 2017

फागुन में मन हिलोर मारे
आईल ना अबहूं सजनवा
सब सखियन मिली ताना मारे
विरह बाण छेदत है करेजवा
मन की मन ही जानै सावरे
जब से गइलै पिया विदेशवा
रात बितल गिन-गिन तारे
न भेजल कोनो पाती न संदेसवा
ए कोयल ले जा तू संदेश हमारे
जा के कहना तुम बिन रास न आवै घर-अँगनवा
आ अब लौट चलो औ परदेशी प्यारे
तोहर धानी सुख भईल ज्यों नागफनी के कँटवा।

Author
सरस्वती कुमारी
सरस्वती कुमारी (शिक्षिका )ईटानगर , पोस्ट -ईटानगर, जिला -पापुमपारे (अरूणाचल प्रदेश ),पिन -791111.
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