*विरह की शमा में*

तुम्हारे विरह की श़मा में जल रहा हूँ,
तुम्हारी यादों के संग-संग चल रहा हूँ !
ख़लने लगा हूँ अब तो दोस्तों को अपने,
वे सोचते हैं कि मैं बेढंग चल रहा हूँ !
बताऊँ तो कैसे तुम्हारी यादों के पुलिंदे,
सहूँ भी तो कब तक असह ताने-बाने!
तुम आओगी या फिर बुलाओगी मुझको,
बस इसी इक इंतज़ार में पल रहा हूँ !
तन की खबर है ना मन का पता है!
न मालूम मुझसे हुई क्‍या खता है !
हुई दूर जब से दिलो जान जल रहा हूँ !
बारिशों में पतंगा मेहमान हूँ ‘मयंक’,
सावन की फुहारों में बेजुबान जल रहा हूँ !
‌‌‌ रचयिता : के.आर.परमाल ‘मयंक’

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 2

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share