कुण्डलिया · Reading time: 1 minute

विनोद सिल्ला की कुंडलियां

भेदभाव सिर चढ़ गया, समानता है क्षीण|
कामयाब बस है वही, जो कपट में प्रवीण||
जो कपट में प्रवीण, उसकी दासी है सत्ता|
सकल सुख सत्ता संग, सत्ता समक्ष सब धत्ता||
कह सिल्ला कविराय, सबसे रखिए समभाव|
मानवता के लिए नहीं, है उचित भेदभाव||

-विनोद सिल्ला©

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टोहाना, जिला फतेहाबाद हरियाणा
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