.
Skip to content

विनाश कर लिया

प्रदीप कुमार गौतम

प्रदीप कुमार गौतम

कविता

July 17, 2017

विकास की राहों में
सड़कों का निर्माण पर
पेड़ो की कटान को
हर पल देखा
कानपुर से झाँसी के
लाखों पेड़
एक साथ ढहा दिए गए
बिगड़ गया संतुलन
पर्यावरण का
हो गया ह्रास
धरती धधक उठी धरा
प्यास से आकुल
दिन प्रतिदिन मरते जानवर
व्याकुल मानुष
वर्षा ऋतु में भीगी
सड़कों में
देश मे बहता जलजला देखा
लेकिन बुंदेली धरती को
वर्षा ऋतु में भी
तपते देखा
चला था मनुज
विकास की राहों में
लेकिन खुद का विनाश
कर बैठे
———————-
प्रदीप कुमार गौतम
शोधार्थी, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय,झाँसी

Author
प्रदीप कुमार गौतम
शोधार्थी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी(उ0प्र0) साहित्य पशुता को दूर कर मनुष्य में मानवीय संवेदनाओ का संचय करता है एवं मानवीय संवेदनाओ के प्रकट होने से समाज का कल्याण संभव हो जाता है । इसलिए मैं केवल समाज के कल्याण के लिए... Read more
Recommended Posts
सोनागाछी - कमाठीपुरा - जीबी रोड
सोनागाछी - कमाठीपुरा - जीबी रोड सोनागाछी - कोलकाता, कमाठीपुरा - मुंबई, जीबी रोड - दिल्ली, ये नाम बहुत जाने पहचाने से लगते हैं |... Read more
अॉड ईवन
अॉड और ईवन" १ ~~~~~~~~~~~ निशा के घर उसकी बचपन की सहेली मोनाली आई थी। सालों बाद मिल रही थीं दोनों। मोनाली के पति का... Read more
तन्हा ही करते सफर देखा गया
छूटता दोषी इधर देखा गया धन को पुजते जब उधर देखा गया मौत से कोई बचा पाया नहीं पर डरा हर उम्र भर देखा गया... Read more
अचंभित हूँ ....(कहानी)
बात बीते साल की है ! जब मैं इस शहर मैं नया-नया सा था, अनजान शहर अनजाने लोग, पढ़ाई भी चल ही रही थी दूसरी... Read more