.
Skip to content

विधा बरसाती रोग

Sajoo Chaturvedi

Sajoo Chaturvedi

कविता

August 8, 2017

बरसात का देखिए कमाल।
कहीं सूखा है कहीं बाढ़।
तबाही चारों ओर है मची
बरसाती रोंगों की भरमार।।.

डाक्टर के नखरे हजार।
रोगी है रोग से लाचार।
नर्सिंगहोम के क्या कहने,
गरीब हो गया बेचारा।।

लेटने को पलंग नहीं।
पैसा है दवाई नहीं।
स्टाप मौजमस्ती में,
लगती अब दुआऐं नहीं।।
सज्जो चतुर्वेदी********Shahjahanpur

Author
Recommended Posts
वर्षा में नदी
सुस्त-सी पड़ गई नदी अचानक उठ खड़ी होती है वर्षा में वर्षा में वह निकाल देना चाहती है उसकी नस नस में भरा गया जो... Read more
मेरे प्यारे भारत देश जो पूछे कोई तेरा वेश !
मेरे प्यारे भारत देश जो पूछे कोई तेरा वेश ! कहीं विस्तृत -विस्तृत हैं खेत, कहीं है फैली बालू रेत, छटा नहरों की कहीं विशेष,... Read more
तास के पत्ते
धरती ढीली हो, माटी गीली हो सांस लेने निकल आते, जमीन मे छुपे साँप, बिच्छू, कुकर्मुत्ते लगा लगा छत्ते । धरती कड़ी हो, दरारें भी... Read more
कहीं पे कियूं बूंद बूंद को तरसता है आदमी
कहीं पे कियूं बूँद बूँद को तरसता है आदमी कहीं पे कियूं पानी पानी भी होता है आदमी ********************************** कहीं पे पड़ता है कियूं समन्दर... Read more