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विधाता छंद में लिखा एक गीत

विधाता छंद
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14-14 पर यति = २८ मात्राएँ
1, 8,15,22 पर लघु
1222 1222, 1222 1222
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लगागागा लगागागा, लगागागा लगागागा
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मुफाईलुन मुफाईलुन, मुफाईलुन मुफाईलुन
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दिवाकर ढल गया जब तो , “तिमिर” फैला हुआ तब है,
सुधाकर दिख गया अब तो , “तिमिर” का नाश तो अब है।
निशा का रंग काला है, तभी भय है जगत भर में,
भयानक रात होती है ,कहीं दिखता नहीं अब है। ०१
दिवाकर ढल गया जब तो……….
“बुरी घटना” घटी थी जब, तभी भी “रात” काली थी,
विरह में गीत गाता था ,प्रिये को भूलना कब है। ०२
दिवाकर ढल गया जब तो………..
“सवेरा” हो रहा अब है , हमें यह ज्ञात होता है,
खुले बंधन “तिमिर” के हैं , ख़ुशी की लहर तो अब है। ०३
दिवाकर ढल गया जब तो……….
मधुर कलरव करें पंछी, गगन भर लालिमा छाई,
सवेरा हो गया है अब ,”तिमिर” तो मिट गया सब है। ०४
दिवाकर ढल गया जब तो………
:- प्रो. राहुल प्रताप सिंह

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राहुल प्रताप सिंह
राहुल प्रताप सिंह
Kotar, Satna Madhya Pradesh
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