मुक्तक · Reading time: 1 minute

विधाता छंद आधारित मुक्तक (भोजपुरी)

कहीं ऊ वोट मांगत बा, कहीं शासन चलावत बा।
कहीं बा नेह बरसावत, कहीं सबका लड़ावत बा।
गज़ब के रूप नेता के, कहीं; कइसे बताई हम-
बदल वेदार के जइसन, सदा ई रङ्ग दिखावत बा।

✍️ पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’
मुसहरवा (मंशानगर)
पश्चिमी चम्पारण, बिहार

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