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विदाई गीत

———–विदाई गीत———
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आखों में आँसू हम संजोए हुऐ
कर रहें हम तुम्हें,हैं खुद से जुदा
खुश रहो तुम सदा,जहाँ भी रहो
दे रहें हम तुम्हें,हैं दिल से दुआ
सुन्दर बगिया के फूल तुम सभी
सींचा दिल से तुम्हे ,महको सदा
यूँ ही फलते हुऐ,आगे बढते हुए
मधुर महक बखेरो,यही है दुआ
जब आए यहाँ तुम अन्जान थे
मासूम मुख, अरमान देखें सदा
हमने दिल से सदा संवारा तुम्हे
महकते रहो ,तुम चमन में सदा
संग खेलते हुए ,आगे बढते रहे
कभी लङते रहे,गले मिलते रहे
समय बीत गया ,हम अंजान थे
आ गई अब घड़ी,हम होंगे जुदा
खूब सेवा करो तुम माँ बाप की
जिम्मेदारी निभाते रहो तुम सदा
पंछियों की तरह,गगन छूते रहो
धुर्व तारे की तरह ,चमकों सदा
मन उदास है,दिल में बहुत खुशी
दिल से दुआ,खुश रहो तुम सदा
दीप शिक्षा का जीवन में जगाकर
ज्ञान बाँटते रहो तुम यही है दुआ
पल अनमोल होंगे, आओगे तुम
कामयाबी पर हम खुश होंगें सदा
ज्ञान तुमको दिया, काम आ गया
ज्ञान चरितार्थ हो,यही हमारी रजा
गिले शिकवे सदा तुम भूल जाना
मधु यादों को दिल में रखना सदा
बीते पल कभी ना वापिस आएंगे
सुखविन्द्र यादों में तुम बसना सदा

सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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Author
सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन अध्यापक शौक ःःकविता लिखना,पढना भाषा ःःहिंदी अंग्रेजी पंजाबी हिन्दी साहित्यपीडिया साईट पर प्रथम रहना प्रतिलिपि…
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