31.5k Members 51.9k Posts

विजात छंद

Sep 9, 2017 05:53 PM

???????
विजात छंद
———-( 14 मात्रा- मापनी 1222 1222 )
***********
बड़ा नटखट कन्हैया है ।
चराता वन में’ गैया है ।।
बजाता बाँसुरी प्यारी ।
वही कहलाय बनवारी ।।1
***
वही है नंद का लाला ।
उसी के संग हैं ग्वाला ।।
यशोदा का वही छैया ।
लगाता पार वो नैया ।।2
***
उसे ही कृष्ण कहते हैं ।
हमारे उर में रहते हैं ।।
उसे है राधिका प्यारी ।
कहाया वो हि गिरिधारी।।3
***
वही माखन चुराता है ।
वही नटवर कहाता है ।।
सभी गोपी उसे चाहें ।
पकड़ लेतीं बढ़ा बाहें ।।4
***
नचातीं छाछ देकर के ।
कटोरा दूध का भर दे ।।
सभी थीं कृष्ण दीवानी।
नयन में प्रेम का पानी ।।5
***
नमन स्वीकार कर लीजे।
हमें अपनी कृपा दीजे ।।
शरण रखना हमें राधा।
हमारी काट दो व्याधा ।।6
***
-महेश जैन ‘ज्योति’,
?☘?☘?☘?

1 Like · 431 Views
mahesh jain jyoti
mahesh jain jyoti
Mathura
71 Posts · 2.4k Views
"जीवन जैसे ज्योति जले " के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ...
You may also like: