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विक्लांगता नहीं कोई अभिशाप

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

May 18, 2017

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विक्लांगता नहीं कोई अभिशाप।
ना ही पूर्वजन्म का कोई पाप।
ना ही ईश्वर का कोई श्राप,
संसार का श्रेष्ठ प्राणी हैं आप।

लोगों की अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत,
इन्हें दया नहीं,चाहिए प्रोत्साहन और हिम्मत।

दे इन्हें पूर्ण सहभागिता व प्रशिक्षण,
समान अवसर,अधिकारों के संरक्षण।

ये भी हैं राष्ट्र के निर्माण में सहायक,
स्वयं अपने प्रगति पथ के निर्णायक।

मत करो इनसे घृणा,इनकी उपेक्षा,
छोड़ो व्यंग्य के छीटे कसना व निन्दा।

मत करो इनका उपहास और तंग,
ये अपनी मर्जी से नहीं बने विक्लांग।

इनमें भी है कुछ कर गुजरने का दम,
ये नहीं किसी मामले में किसी से कम।

इन्हें भी समाज में बराबरी से जीने का हक।
इनकी प्रतिभा,क्षमता पे नहीं है कोई शक।

इनमें भी कुछ कर दिखाने का जज्बा,
बड़ा मुकाम हासिल करने का हौसला।

इनमें भी सामर्थ्य,शक्ति और इच्छा,
सोचने समझने की अद्भुत क्षमता।

विक्लांगता कभी भी नहीं रोकती सफलता,
सोच सकारात्मक हो तो आकाश छूता।

अपनी इच्छा शक्ति से हर क्षेत्र में टक्कर देता,
हौसले बुलंद हो तो नित नया आयाम रचता।

ये अपनी कमजोरियों को बनाकर हथियार,
हर कठिनाईयों पर नित करता है वार।

‘निक’जन्म से ही विक्लांगता से जूझनेवाला।
लाखो लोगों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देनेवाला।

‘निक’के हाथ और पाँव नहीं
फिर भी हौसले में कोई कमी नहीं।

स्टीफन हाॅकिन्स को दुनिया में कौन नहीं जानता।
विकलांग होकर भी विज्ञान के क्षेत्र में तहलका मचा दिया।

गिरीश शर्मा,रविन्द्र जैन,एच रामाकृष्णन,
अरूणिमा सिन्हा,शेखरनायक,सुधा चंद्रन।

ऐसे ही कितने ही विकलांग साथियों के नाम,
जिन्होंनें शरीर का अंग खोकर भी रचा कीर्तिमान।

इन्होंने साहसिक काम को दिया है अंजाम।
इन सभी के इच्छा शक्ति को हमारा सलाम।
????-लक्ष्मी सिंह??

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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