Skip to content

विकास

Rajeev 'Prakhar'

Rajeev 'Prakhar'

कविता

June 15, 2016

विकास का प्रतीक इक शहर,
गन्दगी में फँसा,
रो रहा था l
क्योंकि, कई वर्षों से वहाँ,
किसी मन्त्री का दौरा,
नहीं हो रहा था l
आखिरकार,
चमके उस शहर के सितारे,
और, एक मन्त्री जी,
निरीक्षण हेतु पधारे l
अब सम्बंधित विभागों को,
सफ़ाई-सज्जा के अतिरिक्त,
कोई और काम न था l
अजी, गन्दगी का तो,
अब नामोनिशान भी न था l
मन्त्री जी का दौरा,
समाप्त हो गया है l
और, यह शहर,
अगले दौरे की प्रतीक्षा में,
खो गया है l

(सर्वाधिकार सुरक्षित)

-राजीव ‘प्रखर’
मुरादाबाद (उ. प्र.)
मो. 8941912642

Share this:
Author
Rajeev 'Prakhar'
I am Rajeev 'Prakhar' active in the field of Kavita.

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you