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वास्ता टूट गया

Rita Yadav

Rita Yadav

कविता

June 23, 2017

दीया जलाने लगे
आजकल हम आंधी में

आग बुझती ही नहीं
जो लगी है पानी में

सत्य छुपता नहीं है
झूठ की कहानी में

सर झुकता नहीं है
किसी से अभिमानी में

वास्ता टूट गया मेरा तेरा
इक नादानी में
रह गई बातें फकत जुबा पर
इक कहानी में

रीता यादव

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Author
Rita Yadav
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