Apr 6, 2020 · कविता
Reading time: 1 minute

वायरस

वायरस
जी हाँ एक वायरस।
और पूरी दुनिया हिल गई।
महाशक्तिशाली एक देश ने भी
हाथ खडे कर दिए।
और कुछ विकसित देशों के भी
हालात बदतर।
सब धरा रह गया।
परमाणु, मिसाइल,
कोठी, कार, स्वर्णाभूषण आदि।
सबका ध्यान एक ही तरफ
ओर न कोई सुध।
विकसित देशों की स्वास्थ्य सुविधाएं भी
दे गई जवाब अब क्या करें।
कहां से आया क्यूँ आया
सवाल नही महत्वपूर्ण फिलहाल
इससे बचने का क्या है विकल्प
सवाल ये है सम्मुख खडा।
हो सकता है किसी इंसानी गलती से ये फैला
और प्रकृति क्रुद्ध हो गई।
शायद ऊंचा उडने की चाह हमें
ले जा रही गर्त की ओर।
क्यों न गम्भीरता से इस पर हम सोचें
प्रकृति से खिलवाड न करें
और उसके सामने नतमस्तक हो
उसकी सहानुभूति प्राप्त करें।
और सब प्राणी मात्र का भला सोचते हुए
‘जीओ और जीने दो’ की भावना पर काम करें।
अब सोचना होगा पूरे विश्व को इस तरह
और झुकना होगा उस परमात्मा के चरणों में
जो सबका रखवाला है।
उसे प्रसन्न करें
प्रकृति माँ को प्रसन्न करें
और उसकी दया के पात्र बनें
तब शायद हमारा भला ही भला होगा।

—-अशोक छाबडा. कवि,
गुरूग्राम।

1 Like · 2 Comments · 38 Views
Copy link to share
Ashok Chhabra
125 Posts · 3.5k Views
Follow 7 Followers
Poet Books: Some poems and short stories published in various newspaper and magazines. View full profile
You may also like: