Sep 3, 2016 · कविता
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वायदा है….

मत भटक दर बदर
तुझे है क्या खबर
संवरेगा तेरा भी मुकद्दर
खुदा का वायदा है
ईमान के दिन भी पलटेंगे।।

^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^

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Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज... View full profile
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