कविता · Reading time: 1 minute

वामन अवतार

आज वामन जयंती है। वामन अवतार पर रोला छंद (11-13) में कथा-
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कश्यप-अदिति सुपुत्र, प्रथम त्रेता अवतारी।
वामन रूप स्‍वरूप, धरा कछु सोच विचारी।।
बलि दयालु प्रह्लाद पौत्र सुत असुर विरोचन।
जीत लिया तिरलोक, किया तप सिद्ध प्रयोजन।।1।।

राजसभा में पहुँच, गये मुनि वामन बन कर।
बलि जब हुआ प्रसन्न, देख बालक सा मुनिवर।।
बलि ने तप से जीत, त्रिलोकी राज बढ़ाया।
था प्रबुद्ध किन्तु बलि, उनको हरा ना पाया।।2।।

वामन का अवतार धारि पग तीन बढ़ाए।
कर अमरत्व प्रदान, बली पाताल बिठाए।।
देवलोक, भू लोक, लिए बलि माथ बिराजे।
देवलोक पा पुन:, इंद्र सुरपति कह राजे।।3।।

प्रकट हुए विष्णु ने, स्वरूप विराट दिखाया।
बलि को दी उपाधि, वह महा बली कहाया।।
कह ‘आकुल’ कविराय, सुरासुर सभी मनाये।
यह ब्राह्मण अवतार, धर्म की राह बताये।।4।।

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