वादा करके मुकर गया कोई

वादा करके मुकर गया कोई

वादा करके मुकर गया कोई

लगा, हँसते को रुला गया कोई

हसरत थी उसकी भी उड़ने की

मगर , पंख चुरा ले गया कोई

तुझसे मुहब्बत हुई , तो क्या गुनाह

हुआ

इसी बहाने खुदा के और करीब आ

गया हूँ मैं

सच को मैं जितना तोलूँ , उतना

ही

ये पावन लागे

नील गगन के तारे , सच बिन सब

कुछ फीका लागे

उसकी नन्ही मुस्कान चांदनी बिखेरती

कह गई मुझसे

इस नन्ही मुस्कान को सीने से लगा

उस खुदा का एहसास करो

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मैं अनिल कुमार गुप्ता , शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ मुझे कवितायें लिखने ,...
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