Skip to content

वादा आज तुम तोड़ देना

पारसमणि अग्रवाल

पारसमणि अग्रवाल

कविता

March 6, 2017

वादा आज तुम तोड़ देना।
बेवफाओं में नाम जोड़ देना।

लिखी थी इबारत प्रेम की,
अब उन पन्नों को मोड़ देना।

याद आये अगर तुम्हें मेरी,
तो निशानियों को फोड़ देना।

वापस आएगा बीता कल
अब ये ख्याल छोड़ देना
   
     – पारसमणि अग्रवाल

Whatsaap-8005271243
Facebook पर फॉलो करें
Parasmani Agrawal konch
Twitter- @KAVI PARAS

Share this:
Author

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you