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“वाणी का महत्त्व” दोहे

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

दोहे

July 10, 2017

“वाणी का महत्त्व” दोहे
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मुख चंदा तन चाँदनी,रूप सजा इठलाय।
कटु वाणी से वार कर,नारी गई लजाय।।

धन दौलत का तोल नहिं,शब्द बढ़ावे मोल।
पीर पराई हर लई,वाणी है अनमोल।।

मधुर वचन औषध सदा,आहत मन सुख पाय।
कटु वाणी ज़ख्मी करे,कोमल मन कुम्लाय।।

मीठे वचन सुनाय के,हर लो जन उर आज।
वशीकरण का मंत्र ये, बैठा कंठ बिराज।।

रूप रंग समरूपता,कोकिल काक जनाय।
जब आवे मधुमास रुत,वाणी भेद बताय।।

डॉ. रजनी अग्रवाल”वाग्देवी रत्ना”
संपादिका- साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी (मो.-9839664017)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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