कविता · Reading time: 1 minute

वह मेरा आसमान नहीं

वह रंग नहीं
उस बादल का जो
दूर से वह दिखता है
वह मेरा आसमान नहीं
वह तो मुझे एक नाग सा
डसता है
बहुत फर्क होता है
तेज हवाओं और
आंधियों में
कहने को तो है
मेरी अपनी परछाई पर
इसका साया मेरे साथ साथ
चलकर भी
मेरे साथ नहीं चलता है।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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