*वसंत-पंचमी*

*वसंत-पंचमी*
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आया रे आया रे ऋतुराज,
मनाओ रे सखी वसंत पंचमी,
कोयल की कुंहूँ कुंहूँ की बोली,
पतझड़ बीता, भईं हरी भरी डाली|१|

बडा़ ही सुहाना मौसम लागे,
चारो दिशाओं हरियाली छाए,
फैला चहु दिश संगीतमय वादन,
‘माता’ सरस्वती का है अभिवादन|2|
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✍ धीरेन्द्र वर्मा
मोहम्मदपुर दीना जिला-खीरी (उ.प्र.)
Email–dkverma9984@gmail.com
#साहित्यपीडिया

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