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वसंत का स्पर्श

ईश्वर दयाल गोस्वामी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

कविता

February 21, 2017

वसंत का स्पर्श
अब आनंद नहीं है
आदमी की आँखों में ।
‘जले पर छिड़का
गया नमक है ।’
कोई आशा बाकी नहीं है
आदमी के भीतर
सोये आदमी के जगने की ।
बेशक !
जिस गति से
बढ़ रही है
यह दुनियाँ आगे-आगे
उसी रफ़्तार से
जा रहा है
आदमी पीछे-पीछे ।
यकीन है कि –
भविष्य की दुनियाँ में
सब-कुछ होगा
सारा साज़-ओ-सामान
होगा ऐश्वर्य का ।
किन्तु उसमें नहीं होगा
आदमी और
आदमियत का आनंद ।
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कवि एवं शिक्षक ।

Author
ईश्वर दयाल गोस्वामी
-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार... Read more
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