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वसंत ऋतु…………

पूनम झा

पूनम झा

कविता

February 3, 2017

वसंत ऋतु —-
वसंत ऋतु जब आये
पुष्प पुष्प मुस्काये
पीतांबरी में वसुंधरा
देख गगन भी हर्षाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
*
आम में मंजरी आये
महुआ मादकता फैलाये
कूके कोयल बैठ डाली
मीठी-मीठी तान सुनाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
*
तितलियाँ फूलों पर मंडराये
स्वर विहंगों के संगीत सुनाये
प्रेम से ओतप्रोत लगे वसुधा
वसंत इसे प्रेममय कर जाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
*
बहे बयार जैसे मल्हार गाये
पेड़-पौधे झूम-झूम लहराये
समेट रहे रवि अपनी उष्मा
वो भी सबका साथ निभाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
*
वसंत ऋतु सतरंगी बनजाये
ये राग-द्वेष दूर भगाने आये
सीख ले गर मानव इससे तो
द्वेष भाव स्वत: दूर हो जाये
ये ॠतु मधुमास कहाये।
@पूनम झा।कोटा, राजस्थान 03-02-17
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Author
पूनम झा
मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है।... Read more
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