मुक्तक

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वर्षा रानी को देख कर खुश हो रहा किसान।
मन में उसके सज गये आज हजारों अरमान।
गुनगुनाता गीत गाता काधे पर हल लेकर-
चल दिया वह भींगता खेतों में रोपने धान।
-लक्ष्मी सिंह

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