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वर्षा का मौसम है।

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

July 12, 2017

बूँदे गिरती छम छम है।
कही अधिक कही कम है।
दिखता नही कही तम है ।
मृदा होती ऊष्ण नम है ।
वर्षा का मौसम है।
पक्षी प्यास बुझाते है।
मयूर नाचते गाते हैं ।
कोयल कूक लगाते हैं ।
सब हर्षित हो जाते हैं ।
नही किसी को गम है
वर्षा का मौसम है।
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र

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Author
Vindhya Prakash Mishra
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ । चिंतनशील जीव होने के कारण कुछ न कुछ सृजित करता हूँ । पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में मनन... Read more
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