कविता · Reading time: 1 minute

वर्षा का मौसम है।

बूँदे गिरती छम छम है।
कही अधिक कही कम है।
दिखता नही कही तम है ।
मृदा होती ऊष्ण नम है ।
वर्षा का मौसम है।
पक्षी प्यास बुझाते है।
मयूर नाचते गाते हैं ।
कोयल कूक लगाते हैं ।
सब हर्षित हो जाते हैं ।
नही किसी को गम है
वर्षा का मौसम है।
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र

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विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ । मै मौलिक विचारों के बिम्ब को लिपिबद्ध करता हूँ । स्वान्तःसुखाय लिखता हूँ । किसी प्रसिद्धि…
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