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वर्षा ऋतु हाइकु

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

हाइकु

June 19, 2017

“वर्षा ऋतु” हाइकु
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(१) काले बादल
हँसता मरुस्थल
सौंधी खुशबू ।

(२)काली चूनर
सतरंगी डोरियाँ
दामिनी ओढ़े ।

(३)मेघ मल्हार
बूँदों की सरगम
भीगा मौसम ।

(४)भीगी पलकें
नयना नीर भरे
मेघा बरसे ।

(५)बूँदों का स्पर्श
पर्वत सकुचाए
धरा मुस्काए ।

(६)मेघा बरसे
सावन उपहार
कौंधी दामिनी ।

(७)प्रीत का मेला
सावन अलबेला
वर्षा की झड़ी ।

(८)बरखा प्रीत
बरसाती संगीत
नाचे मयूर ।

(९)तडित प्यास
पनघट उदास
बरसो मेघा ।

(१०)बरखा डोली
बिरहन बदली
भीगी पलकें ।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी(म-9839664017)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more

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