23.7k Members 49.9k Posts

वन्दन है

वन्दन है उस गर्भ का जहाँ रहा नौ मास।
जननी का मुझको प्रभो! मात्र बना दो दास।
मात्र बना दो दास, पिता की सेवा कर लूँ।
पापार्जन को त्याग, पुण्य से झोली भर लूँ ।
माता और पिता चरणो में अर्पित चन्दन।
सुखदा जिनकी गोद, सदा उनका है वन्दन।।
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Like Comment 0
Views 28

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
Ashutosh Vajpeyee
Ashutosh Vajpeyee
15 Posts · 98 Views
I am a professional astrologer and very much active in the field of poetry