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वतन

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

कविता

October 1, 2016

उस वक़्त का इन्तजार है जब वतन में खुशहाली होगी,
पतझर हो या सावन, हर मौसम हरियाली होगी,
न दिन में तपन होगी,न रात काली होगी,
हर दिन होली हर रात दिवाली होगी।

हर दिल में देश का,इस चमन का सम्मान होगा,
जहां भर की इबारतों में हिन्दोस्तां का नाम होगा,
सोने चांदी के ख़्वाब न देखे है, न देखेंगे,
गरीबी का हिन्द से काम बस तमाम होगा।

उस वक़्त का इन्तजार है जब हर चेहरे पर लाली होगी,
भूख मिटाने की खातिर किसी की जेब न खाली होगी,
न दिन में तपन होगी, न रात काली होगी,
हर दिन होली हर रात दिवाली होगी।

Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more
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