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वतन की बेबाक खुश्बू

मैं वतन की बेबाक खुश्बू लिख रहा हूँ।
मैं लफ्ज़-ए हिंदी -उर्दू लिख रहा हूँ।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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