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वतन की चाह

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

मुक्तक

September 18, 2017

चाहत ये वतन की तो दिल से न निकलती है
अब खुश्बू-ए-मिट्टी से हर सांस महकती है

हम जाएँ कहीं लेकिन इसकी ही इबादत में
दिन मेरा गुज़रता है हर रात गुज़रती है

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)

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Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more
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