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वक्त

Neelam Sharma

Neelam Sharma

कविता

June 10, 2017

वक्त

वक्त बर्बाद करना ही, जिंदगी बर्बाद करना है
लिया है जन्म आज तो, फिर एक रोज़ मरना है

मेहनती​और कर्मठ का सखा यह वक्त होता है
मगर जो आलसी है, वो नीलम हर वक्त रोता है.

नहीं दूजा गुरु, दानी,बलवान वक्त से कोई
वक्त देता जिसे पीड़ा, जानता है उसे वोही

नीलम शर्मा

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Author
Neelam Sharma
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