Aug 26, 2016 · शेर
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वक्त

न जाने वक्त कितने अनकहे,अनसुलझे,अनछुए पहलू के मर्म को समझाएगा
सचमुच वक्त क्या क्या सितम ढाएगा
जख्म पे जख्म मिलकर नासूर बन जाएगा
न जाने कौन सा वक्त मरहम लेकर आएगा

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NIRA Rani
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे... View full profile
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