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*वक्त बदलेगा हमारा देखना*

Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir

गज़ल/गीतिका

June 23, 2017

*वक्त बदलेगा हमारा देखना*

वक्त बदलेगा हमारा देखना !
शान से होगा गुज़ारा देखना !!
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गरदिशों के काफ़िले को रौंदकर !
ज़िंदगी देगी सहारा देखना !!
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अज़्मो-हिम्मत की निशानी है यही !
तुँद मौजों में किनारा देखना !!
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कुछ दिनों की बात है सुन लो सभी !
फ़िर बुलंदी पर सितारा देखना !!
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ख्वाहिशें दिल की अगर तुम छोड़ दो !
क्या मुनाफा क्या खसारा देखना !!
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बल अकेलेपन का गर पहचान ले !
फ़िर मुसाफ़िर तू नज़ारा देखना !!
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धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफिर”
9034376051

Author
Dharmender Arora Musafir
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
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