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== वक्त को पहचान लिया हमने ==

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

गज़ल/गीतिका

September 8, 2017

तेरे गरूर को तो करके यूँ टुकड़े-टुकड़े,
हमने भी तेरे उस भरम को तोड़ना शुरू कर दिया।
समय ने भी शुरू किये अपने तेवर बिखेरने
मैंने भी तुमसे कुछ न कहना शुरू कर दिया।
आंखें ही फेर डाली जबसे तुमने देख मुझे,
मैंने भी बेमतलब तुमको मनाना बंद कर दिया।
तूने एक गज की दूरी क्या दिखाई हमको,
हमने सौ गज दूर तुम से रहना शुरू कर दिया।
तुमने बस एक बार किया किनारा हमसे ,
हमने तेरे साये से भी दूर रहना शुरू कर दिया।
मेरा अपनापन जताना भी जब खटका तुमको ,
हमने उस पल से ही चुप रहना शुरू कर दिया।
जब से चुराई हैं तुमने सरे आम आंखें,
हम ने सरे राह तुझे अनदेखा करना शुरू कर दिया।
तुम क्या समझाओगे वक्त की पहचान हमें,
समय और हालात ने हमें सब समझाना शुरू कर दिया।
एक बे मुरव्वत बेपरवाह अपने के बजाय,
बिना अपनों के हमने तो जीना शुरू कर दिया।
——रंजना माथुर दि. 01/07/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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