घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

वंदे मातरम् (सूर घनाक्षरी)-गुरू सक्सेना

सूर घनाक्षरी 30वर्ण
8 8 8 6 यति अंत लघु
वंदे मातरम
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मातृभूमि की पूजा में, सब कुछ होम किया,
बने दिनकर जैसे,नाशने को तम।

बाँकुरे भगत सिंह, बेधड़क बेहिचक,
खुले आम फेक दिया,पापी पर बम।

आजादी की ठानी ठान,ठनती गई लड़ाई
जनता पै होते रहे,जुल्म व सितम।

हौसला बुलंद रहा,शीश न झुकाया कभी,
फांसी चढ़े वीरबोले,वंदेमातरम

गुरूसक्सेना
नरसिंहपुर मध्यप्रदेश

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