कविता · Reading time: 1 minute

वंदना

हर घर में
हैं पूज्य
तुलसी पूजन
है पुण्य
परिवार
तुलसी बिन
है शून्य

हैं तुलसी
औषधियों का
भंडार
आयुर्वेद में
बसा है
फायदों का
संसार

तुलसी की
मातृ छाया
बनी रहे
बच्चों पर
उनकी

जलाते दीपक
नित सुबह शाम
वंदना करते
भक्त सुबह शाम

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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