Sep 14, 2016 · कविता
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लौट न जाये !

खोल दो हृदय कपाट निर्भय ,

देखो तो कौन आया है ?

कहीं वह लौट न जाये ।

ज़ोर से पुकारो बाहें पसार ,

लुटा दो प्रेम और खुशियाँ ।

था जिसका इंतजार ,

वही आया हो, पर ,

कहीं लौट न जाये ।

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