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लौट कर आओगी

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

कविता

September 11, 2016

गुजर जाती है हर शाम उस वक्त को याद कर के,
जो वक्त हसीं तो नहीं मगर अपना हुआ करता था,
तुझे खोकर भी इतनी ही शिद्दत से याद है मुझे,
तुझे पाना एक खूबसूरत सपना हुआ करता था।

अब तो जुगनुओं के उजाले भी मुझे नजर नही आते
तेरे सपने यादों के आँचल से शाम-ओ-सहर नहीं जाते

लौट कर आओगी एक दिन यु ही खिलखिलाते हुए,
जैसे मेरी अंजुरी में तितली रुका करती थी,
जैसे दिल के सागर में लहर उठा करती थी,
जैसे तेरी पलकों में मेरे आंसू हुआ करते थे,
जैसे तेरी पायल को मेरे गीत छूआ करते थे………

Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more
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