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लो मिलन की रात आई

Ananya Shree

Ananya Shree

कविता

January 26, 2017

?मनोरम छंद?

लो मिलन की रात आई!
प्रेम की बरसात लाई!
भीगतें हैँ तन हमारे!
साजना तुमको पुकारें!

चाँदनी छुपने लगी है!
सेज भी सजने लगी है!
बोल दो दो बोल प्यारे!
मूँद लूँ मैं नैन कारे!

हूँ अधूरी बिन तुम्हारे!
बाँसुरी सा तन पुकारे!
थरथराते लव कहेंगें!
अब जुदाई क्यूँ सहेंगें!

?”श्री”?

Author
Ananya Shree
प्रधान सम्पादिका "नारी तू कल्याणी हिंदी राष्ट्रीय मासिक पत्रिका"
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