लोहड़ी,पोंगल (मकर-सक्रांति)

उत्तरायण जब सूरज आये,
ठंडी लहर थर-थर थर्राए!
हर्षोल्लासमय पतंग उड़ाएँ,
मकर-सक्रांति का पर्व मनाएँ!
यह सुसंकेत नई फसल का है,
सब समस्याओं के हल का है,
आओ मिलके खुशियाँ मनाएँ!
हर्षोल्लासमय पतंग उड़ाएँ,
मकर-सक्रांति का पर्व मनाएँ!
उत्तर लोहड़ी, दक्षिण में पोंगल
पूरब-मध्य-पच्छिम भारत तक
आओ ‘मयंक’ तिल लड्डू खाएँ!
मकर-सक्रांति का पर्व मनाएँ!
के.आर.परमाल ‘मयंक’

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