लोग बनते चमचे बीबी के

फ़ेसबुक पर साली का हमनें फोटुवा भी तो चिपकाया है
लोग बनते चमचे बीबी के हमने खुद को कड़छा बनाया है

थुलथुल बॉडी वाली बीबी जब देखो कड़वाहट भरती रहती
और शुगर की बोरी जैसी साली की जुबान पर ही रखवाया है

सब मर्दों के एक ही दर्द अशोक मियाँ यही ठहरा सच पुछो
ससुरालियो ने अपना कूड़ा तो अपने दामादों को थमवाया है

बीबियों को देखो तो जैसे होम मिनिस्टर बनकर घूमती रहती
सालियों के मुँह पर बस देखो जैसे मासूमियत का ही छाया है

बीबी को देखो रोज रोटी इज्जय खराब करती घर में अपने
साली साहिबां कहती घर मे आपके लिये पकवान बनाया है

कितनी भी चाटुकारिता कर लो घर में बीबी की तुम यारों
बदलें में उसकी जुबान पर बस कड़वा करेला ही तो पाया है

रोज जलन होती हमकों कितनी अपने साढ़ू से यारों मत पूछो
स्टाइलिश मूंछो को भी बस साली के चक्कर मे ही मुंडवाया है

बुद्धिजीवी सब पतिदेव सुन लों मेरी बात कान खोलकर यारों
डिक्शनरी में तो साली गाली पर सच में साली भी मोहमाया है

चल अशोक कोई हमदर्दी ना दिखेगी किसी की तुझसे आज
कविता में अगर आकर बीबी ने सर पर बेलन आज बजाया है

अशोक सपड़ा हमदर्द की क़लम से

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स्नातक पास कविता लिखना व कार्टून बनाना अधूरा मुक्तक ,अधूरी ग़ज़ल, काव्यगंगा, हमारी बेटियां आदि...
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