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लोग प्यार को कहते , क्यों ये इक बिमारी है

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

November 30, 2016

लोग प्यार को कहते ,क्यों ये इक बिमारी है
जब की इसकी खुशबू से,हर जगह खुमारी है

इस जहान में कोई दानवीर हो कितना
द्वार पर मगर रब के तो दिखे भिखारी है

खेल रब खिलाता है वक़्त के इशारों पर
हम जमूरे हैं उसके और वो मदारी है

दूर सब से हो जाते छोड़ कर सभी दुनिया
जानते नहीं आती कौन सी सवारी है

है उड़ान भरना आसान कब यहाँ देखो
मिलता अपनों में ही कोई छिपा शिकारी है

प्यार से सजाई है ज़िन्दगी तेरी बगिया
फूल शूल दोनों ने मिल के ये सँवारी है

दाँव खेलती रहती रोज ‘अर्चना’ ये तो
क्या करें यहाँ अपनी ज़िन्दगी जुआरी है
डॉ अर्चना गुप्ता

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Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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